रिपोर्ट अजय वर्मा। फरीदाबाद, 29 अक्टूबर 2026। वर्ल्ड स्ट्रोक डे के अवसर पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद में एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट की शुरुआत की गई। इस यूनिट में रिपीटेटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS) तकनीक के जरिए बिना सर्जरी के मस्तिष्क की गतिविधियों को प्रभावित करने वाले उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक का उपयोग मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय जरूरतों के आधार पर कुछ न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में किया जा सकता है।
यूनिट का उद्घाटन मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के फाउंडिंग मेंबर, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. राजीव सिंघल ने किया। अस्पताल का कहना है कि इस पहल से फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को आधुनिक न्यूरोलॉजी उपचार के विकल्प उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
क्या है rTMS तकनीक और कैसे करती है काम?
rTMS एक गैर-सर्जिकल तकनीक है, जिसमें मैग्नेटिक पल्स के माध्यम से मस्तिष्क के विशेष हिस्सों की न्यूरल एक्टिविटी को प्रभावित किया जाता है। इसका उद्देश्य कुछ स्थितियों में मस्तिष्क की गतिविधियों को नियंत्रित करने और मौजूदा उपचार के साथ मरीजों को अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना है।
अस्पताल में इस तकनीक की उपयोगिता का आकलन स्ट्रोक के बाद हाथ-पैरों की गतिविधियों में कमी, मूवमेंट डिसऑर्डर, लंबे समय से बने दर्द, माइग्रेन, टिनिटस यानी कानों में लगातार आवाज आने की समस्या, डिप्रेशन और ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) जैसी स्थितियों में किया जाएगा। निकोटीन की लत छुड़ाने में सहायक उपचार के तौर पर भी इसकी संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। हालांकि, हर बीमारी और हर मरीज के लिए rTMS उपयुक्त नहीं है। उपचार का निर्णय मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, बीमारी की स्थिति और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे।
स्ट्रोक के बाद रिकवरी में मिल सकती है मदद
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद की प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर-न्यूरोलॉजी डॉ. सुषमा शर्मा ने बताया कि मानव मस्तिष्क में खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने और न्यूरल कनेक्शन को दोबारा व्यवस्थित करने की क्षमता होती है। इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि rTMS तकनीक के माध्यम से मस्तिष्क के चुनिंदा हिस्सों की गतिविधियों को प्रभावित किया जा सकता है। कुछ मरीजों में इसे मौजूदा उपचार और रिहैबिलिटेशन के साथ इस्तेमाल करने की संभावनाएं हैं।
डॉ. शर्मा के अनुसार, स्ट्रोक के बाद रिकवरी, पार्किंसनिज्म में मांसपेशियों की अकड़न, फाइब्रोमायल्जिया, कुछ न्यूरोलॉजिकल दर्द संबंधी समस्याओं, डिप्रेशन और OCD जैसी स्थितियों में इसके उपयोग का मूल्यांकन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बेहतर उपचार के लिए मरीज का सही चयन, व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल और लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।
मरीजों को अपने शहर में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. (कर्नल) नवनीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर इस यूनिट की शुरुआत आधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी को मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां मरीज के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसकी आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती हैं। नई यूनिट से अस्पताल की न्यूरोलॉजी सेवाओं का विस्तार होगा और मरीजों को उनकी जरूरतों के अनुसार उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
अस्पताल का उद्देश्य फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में आधुनिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें इलाज के लिए दूसरे शहरों के बड़े अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े।
न्यूरोलॉजी सेवाओं को मजबूत करने की पहल
एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट की शुरुआत के साथ अस्पताल ने अपनी न्यूरोसाइंसेज सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया है। अस्पताल में एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सुविधाओं, एक्यूट स्ट्रोक मैनेजमेंट, रिहैबिलिटेशन और आधुनिक उपचार तकनीकों के माध्यम से मरीजों को व्यापक न्यूरोलॉजिकल केयर उपलब्ध कराने की योजना है।
ध्यान दें: rTMS की प्रभावशीलता बीमारी और मरीज के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसे सभी स्थितियों का निश्चित या गारंटीड इलाज नहीं माना जाना चाहिए। उपचार से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श जरूरी है।
