टुडे एक्सप्रेस न्यूज़ । रिपोर्ट अजय वर्मा । फरीदाबाद। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को याद करते हुए कहा कि धर्म निर्माण में उनका बहुत बड़ा योगदान है। आठ वर्ष की अवस्था संन्यास धारण कर वे भारत भ्रमण पर निकले, ब्रहमसूत्र गीता और उपनिषेदशकों पर लिखते हुए उन्होंने चारों दिशाओं में चार शंकाराचार्य पीठों की स्थापना है, जिनमें से एक उत्तर भारत का ज्योतिष पीठ बद्दीधाम में बना है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुजी 50 वर्षो तक गद्दी पर विराजमान रहे, इसके बाद उन्हें पीठाश्वर बनने का गौरव प्राप्त हुआ,
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