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Home » पर्नोड रिकार्ड इंडिया कर रही है गांवों का कायाकल्‍प: हर साल 10,000 से ज्‍यादा किसानों की जिन्‍दगी सकारात्‍मक रूप से प्रभावित हुई

पर्नोड रिकार्ड इंडिया कर रही है गांवों का कायाकल्‍प: हर साल 10,000 से ज्‍यादा किसानों की जिन्‍दगी सकारात्‍मक रूप से प्रभावित हुई

vishal rajputBy vishal rajput13/12/2024No Comments5 Mins Read
  • गगनदीप सेठी, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस एवं एस एण्‍ड आर, ने कहा ‘पर्नोड रिकार्ड इंडिया में हमारी एस एण्‍ड आर की पहलें ‘गुड टाइम्‍स फ्रॉम अ गुड प्‍लेस’ के सिद्धांत पर चलती हैं। ‘वाल’ पहल संवहनीयता के लिये हमारी सभी कोशिशों में सबसे आगे है।’

    संवहनीय एवं जलवायु को सहन करने वाली खेती: केमिकल्‍स पर निर्भरता को कम करने और पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने वालीं पुनरुत्‍पादक विधियों से खेती में आ रहा है बदलाव समुदायों के लिये सालभर पानी की उपलब्‍धता: 2019 से 2355 संरचनाओं द्वारा भूमिगत जल के रिचार्ज की क्षमता 4484 मिलियन लीटर हो चुकी है

    8 फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस (एफपीओ) को समर्थन: यह एफपीओ 5 राज्‍यों और 150 गांवों में फैले हैं और 4000 से अधिक छोटे तथा सीमांत किसानों की आजीविका बढ़ा रहे हैं

    महिला किसानों का सशक्तिकरण: 200+महिलाएं ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍थाओं में अपनी भूमिका को नई परिभाषा देने के लिये साधनों, प्रशिक्षण तथा बाजार तक पहुँच से सशक्‍त हो रही हैं

टुडे एक्सप्रेस न्यूज़ | नई दिल्‍ली, 13 दिसंबर 2024: पर्नोड रिकार्ड इंडिया (पीआरआई), दुनिया के स्पिरिट्स एण्‍ड वाइन उद्योग में अग्रणी कंपनी, पर्यावरण के अनुकूल खेती करने और लोगों को सशक्‍त बनाने के लिए अपनी परिवर्तनकारी पहलों से ग्रामीण विकास को बढ़ावा दे रही है। ‘वाल’ (वाटर, एग्रीकल्‍चर, लाइवलीहुड) के क्षेत्र में पीआरआई के सीएसआर प्रोग्राम्‍स के तहत हर साल 10,000 से ज्‍यादा किसानों के साथ मिलकर काम किया जाता है। इससे कृषि के क्षेत्र में मजबूती, नई-नई खोजों तथा समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है। ‘वाल’ मुख्‍य रूप से सामुदायिक आधार पर पूरे साल पानी को सुलभ बनाने (2019 से 2355 संरचनाओं द्वारा भूमिगत जल के रिचार्ज की क्षमता 4484 मिलियन लीटर हो चुकी है), बेहतर उत्‍पादन के लिये माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ावा देने, सूखे से निपटने, संसाधनों का अच्‍छे से उपयोग करने और स्‍थानीय आधार पर वैल्‍यू चेन बनाने पर केन्द्रित है। इसकी सहायता से अब तक कृषि उपज को 20% तक बढ़ाने में सफलता मिली है और इनपुट का खर्च 22% कम हुआ है।

सभी की सफलता पर पीआरआई का केन्द्रित होना 5 राज्‍यों में उसके 8 फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस (एफपीओ) में दिखता है। यह राज्‍य हैं राजस्‍थान, महाराष्‍ट्र, मध्‍यप्रदेश, पंजाब और उत्‍तर प्रदेश। इससे 150 गांवों में 4000 से ज्‍यादा किसानों की कमाई बढ़ रही है। छोटे और सीमांत किसानों द्वारा संचालित यह एफपीओ सहयोग को बढ़ावा देते हैं, वैज्ञानिक जानकारियाँ प्रदान करते हैं और महत्‍वपूर्ण संसाधनों इनपुट्स, क्रेडिट और बाजार की समझ तक पहुँचाते हैं।

महिलाओं का सशक्तिकरण विकास के लिये पीआरआई की समावेशी पहलों का मुख्‍य हिस्‍सा है। पीआरआई अपने 56 वूमन प्रोड्यूसर ग्रुप्‍स के माध्‍यम से महिलाओं के बीच उद्यमिता में नेतृत्‍व को बढ़ावा दे रही है। नासिक में महिलाओं द्वारा संचालित छोटे उद्यम फल-फूल रहे हैं। 3 गांवों के 7 एसएचजी की 60 महिलाएं टोमेटो पॉलीटनल्‍स, फ्लोर मिल्‍स और सेवई मशीन जैसे अभिनव प्रोजेक्‍ट्स चला रही हैं। कानपुर और बहरोड़ में क्रमश: पापड़ बनाने और सरसों का तेल निकालने के लिये पीआरआई की पहलों ने इन पारंपरिक कुशलताओं को फलता-फूलता और संवहनीय उद्यम बना दिया है। एफपीओ के बोर्ड मेम्‍बर्स में 50% महिलाएं हैं और 35% महिलाएं इसकी शेयरधारक हैं। इस प्रकार ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍थाओं में पीआरआई की पहलें लैंगिक समानता की नई कहानी लिख रही हैं।

इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस और एस एण्‍ड आर (सस्‍टेनेबिलिटी एण्‍ड रिस्‍पॉन्सिबिलिटी) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गगनदीप सेठी ने कहा, “पर्नोड रिकार्ड इंडिया में हमारी एस एण्‍ड आर की पहलें ‘’गुड टाइम्‍स फ्रॉम अ गुड प्‍लेस’’ के सिद्धांत पर चलती हैं। ‘वाल’ पहल संवहनीयता के लिये हमारे सभी प्रयासों में सबसे आगे है। यह सामुदायिक सशक्तिकरण से संवहनीय कृषि के लिये हमारी प्रतिबद्धता दिखाती है। इसमें हम जल सुरक्षा, अभिनव पद्धतियों और सार्थक प्रभाव पर ध्‍यान देते हैं। आईओटी टेक्‍नोलॉजी और एआई से संचालित विश्‍लेषण द्वारा पीआरआई लंबे समय तक रहने वाला असर कर रही है। इसके लिये डेटा पर आधारित जानकारियों से किसानों को सशक्‍त किया जाता है, ताकि वे संसाधनों का इस्‍तेमाल करें और संवहनीयता के आंकड़ों पर सटीकता से नजर रखें।’’

पीआरआई के कम्‍युनिटी रिसोर्स सेंटर (सीआरसी) ज्ञान के महत्‍वपूर्ण केन्‍द्रों का काम करते हैं। यह पारंपरिक कृषि को आधुनिक पद्धतियों से जोड़ते हैं। सीआरसी लक्षित आधार पर प्रशिक्षण के कार्यक्रमों, वास्‍तविक समय में बाजार की जानकारी और आवश्‍यक संसाधनों की पेशकश करते हुए, किसानों को सूचित फैसले करने, उपज बढ़ाने और लंबे समय तक संवहनीयता सुनिश्चित करने के लिये सशक्‍त करते हैं। इसके अलावा, पीआरआई के 8 किसान संसाधन केन्‍द्र (कस्‍टम हाइरिंग सेंटर) 82 गांवों में 4250 किसानों को मेकैनाइज्‍़ड टूल्‍स प्रदान करते हैं। इससे कृषि में मेकैनाइजेशन को बढ़ावा मिलता है और उत्‍पादकता बढ़ती है।

नवाचार, समावेशन और संवहनीयता के लिये अपनी प्रतिबद्धता के माध्‍यम से पीआरआई ग्रामीण भारत में लगातार बदलाव लाने वाली एक ताकत बनी हुई है। इसका सर्वांगीण तरीका किसानों की तात्‍कालिक आवश्‍यकताएं पूरी करता है और अपने से सेवा प्राप्‍त करने वाले समुदायों की लंबे समय तक समृद्धि भी सुनिश्चित करता है। पीआरआई की पहलों का कृषि की महत्‍व श्रृंखला पर बड़ा असर होता है। इससे किसानों की आजीविका बढ़ रही है, महिलाएं सशक्‍त हो रही हैं और ऐसे भविष्‍य का रास्‍ता बन रहा है, जहाँ ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍थाएं स्‍थायी तरीके से फलें-फूलें।

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