देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अक्सर दो तरह की तस्वीरें सामने आती हैं। एक तरफ पेपर लीक, अव्यवस्था और अभ्यर्थियों के विरोध-प्रदर्शन की खबरें होती हैं, तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे प्रयास भी दिखाई देते हैं जिनका उद्देश्य परीक्षा को अभ्यर्थियों के लिए अधिक सुगम, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना होता है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की हालिया परीक्षा के दौरान राज्य सरकार ने अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए कई विशेष व्यवस्थाएँ कीं। दूर-दराज़ से आने वाले विद्यार्थियों के लिए परिवहन की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर हरियाणा पुलिस ने भी जरूरतमंद अभ्यर्थियों को अपनी गाड़ियों से परीक्षा केंद्र तक पहुँचाया, ताकि कोई भी अभ्यर्थी केवल परिवहन की समस्या के कारण अपने भविष्य की परीक्षा से वंचित न रह जाए। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, निगरानी और पारदर्शिता के व्यापक इंतज़ाम किए गए, जिससे परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं परीक्षा केंद्रों पर पहुँचे। उन्होंने अभ्यर्थियों से सीधे बातचीत कर उनका हालचाल जाना और पूछा कि उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी तो नहीं है। सरकार का संदेश स्पष्ट था कि परीक्षा केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। हरियाणा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर लगातार जोर दिया गया है। मेरिट आधारित चयन और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में कई प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। यही कारण है कि आज अनेक लोग यह मानने लगे हैं कि नायब सरकार पारदर्शी परीक्षाओं और अभ्यर्थियों के भरोसे की पहचान बनती जा रही है। परीक्षा के दिन दिखाई गई संवेदनशीलता ने इस विश्वास को और मजबूत करने का प्रयास किया है। हाल के वर्षों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। युवाओं की मांग हमेशा यही रही है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो। लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यह भी जरूरी है कि जहाँ सरकारें सकारात्मक और प्रभावी कदम उठाती हैं, उन्हें भी उसी निष्पक्षता से देखा जाए। साथ ही यह भी उतना ही स्पष्ट है कि यदि किसी भी परीक्षा में पेपर लीक, धांधली या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसके खिलाफ सबसे कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्पष्ट शब्दों में कह चुके हैं कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। NEET परीक्षा से जुड़े मामलों में भी जांच एजेंसियों को सक्रिय किया गया, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और जहाँ आवश्यकता पड़ी, वहाँ पुनर्परीक्षा आयोजित कर योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा का प्रयास किया गया। आखिरकार, किसी भी सरकार की असली पहचान केवल परीक्षा आयोजित कराने से नहीं बनती, बल्कि इस बात से बनती है कि वह परीक्षा प्रक्रिया को कितना निष्पक्ष, पारदर्शी और अभ्यर्थी-केंद्रित बनाती है। हरियाणा में हालिया परीक्षा के दौरान दिखाई गई व्यवस्थाएँ इसी सोच की झलक देती हैं। साथ ही यह भी उतना ही आवश्यक है कि भविष्य में चाहे किसी भी राज्य या किसी भी परीक्षा में कोई अनियमितता सामने आए, उस पर बिना किसी समझौते के सख्त कार्रवाई हो। क्योंकि युवाओं का भरोसा ही किसी भी परीक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी पूंजी होता है।
Video news –
