फरीदाबाद, 01 अगस्त । हरियाणा विधानसभा के आखिरी मानसून सत्र में विपक्षी विधायकों ने सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है, जहां विधायक अपने क्षेत्र में व्याप्त मूलभूत सुविधाओं की कमी के मुद्दे को जोरशोर से उठाएंगे वहीं सरकार के सौतेले व्यवहार के कारण त्रस्त जनता की मांगों पर भी सरकार से दो-दो हाथ करने के मूड में है। इसी कड़ी में तिगांव के कांग्रेसी विधायक ललित नागर ने भी क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों को विधानसभा पटल पर रखकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। विधानसभा के आखिरी सत्र के दौरान विधायक ललित नागर तिगांव क्षेत्र के 19 गांवों के किसानों का मुआवजा, जो हाईकोर्ट ने तय किया है, वह मुआवजा कब तक और कितना दिया जाएगा वहीं तिगांव क्षेत्र में बसे ग्रेटर फरीदाबाद जिनका ईडीसी व आईडीसी शुल्क हरियाणा सरकार में जमा है, इनको मूलभूत सुविधाएं बिजली, पानी, सडक़ सीवरेज व यातायात कब तक मुहैया होगी और जिन फ्लैट धारकों को तय समय पर अभी भी कब्जा नहीं मिला, क्या उन बिल्डर्स के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही होगी। इसके अलावा तिगांव क्षेत्र में सेक्टर-29, स्प्रिंग फील्ड कालोनी, इंद्रप्रस्थ कालोनी, अशोका एंक्लेव में बरसात में सडक़ों और लोगों के घरों में पानी भर जाता है, इस पानी की निकासी के लिए सरकार के पास कोई प्रावधान है, अगर है तो किस चरण में है। वहीं तिगांव क्षेत्र के पल्ला, सेहतपुर, अगवानपुर, बसंतपुर, इस्माइलपुर व तिलपत में बसी कालोनियों में सडक़, पक्की गलियां, नालियां, अस्पताल, सरकारी स्कूल, पार्क व यातायता व्यवस्था का कोई प्रावधान है, अगर तो वह किस चरण में व कब तक शुरु होगा। इसके अतिरिक्त तिगांव क्षेत्र की राजीव कालोनी, संतोष नगर में पीने के पानी की व्यवस्था का प्रावधान सरकार के पास विचाराधीन है, अगर है तो वह किस चरण में होगा तथा तिगांव क्षेत्र के श्रमिक विहार कालोनी में बसे लोगों को हुडा ने आज तक मालिकाना हक नहीं दिया, क्या सरकार के पास मालिकाना हक देने का कोई प्रावधान है, अगर है तो किस चरण में है। इन सभी मुद्दों को लेकर विधायक ललित नागर इस बार विधानसभा के मानसून सत्र में मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों से पुरजोर बहस करने के मूड में नजर आ रहे है। श्री नागर का कहना है कि वह पिछले पांच सालों से तिगांव क्षेत्र के विकास में सरकार द्वारा बरते जा रहे भेदभाव को लेकर विधानसभा में सरकार का ध्यान आकर्षित करते रहे है, लेकिन इस सरकार की कथनी और करनी में अंतर साफ दिखाई देता है। अबकि बार भी वह पूरे जोश के साथ आखिरी मानसून सत्र में क्षेत्र में व्याप्त समस्याओं को लेकर विधानसभा के पटल पर सरकार को घेरने में कोई कोर कसर बाकि नहीं छोड़ेंगे।
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