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    Home » न्याय सिर्फ कागजो तक ही सिमित नहीं रहना चाहिए : न्यायधीश एस के मित्तल – चेयरमैन – मानवाधिकार आयोग।

    न्याय सिर्फ कागजो तक ही सिमित नहीं रहना चाहिए : न्यायधीश एस के मित्तल – चेयरमैन – मानवाधिकार आयोग।

    Ajay vermaBy Ajay verma25/01/2019No Comments5 Mins Read

    TODAY EXPRESS NEWS : संविधान में हर आदमी को जो अधिकार मिले है उसकी प्रोटेक्शन उसे हर हाल में मिलनी ही चाहिए यह उसका अधिकार है इसलिए हर आदमी को संविधान के तहत न्याय मिलना ही चाहिए और यह न्याय सिर्फ कागजो तक ही सिमित नहीं रहना चाहिए।  यह बयान मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन न्यायधीश एस के मित्तल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिया।  मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन आज फरीदाबाद स्थित के एल मेहता दयानन्द कालेज फॉर वूमेन में डिग्री वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे थे जहाँ उन्होंने छात्राओं को डिग्रियां वितरित की। इस मौके पर उनके साथ मानवाधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया भी मौजूद रहे।  उन्होंने बताया की 2012 से 2018 तक जबसे हरियाणा में मानवाधिकार आयोग स्थापित हुआ है तब से अब तक आयोग में 13 हजार शिकायते आयी थी जिनमे से 11 हजार शिकायतों के मामलो को निपटा दिया गया है.

    पत्रकारों से बातचीत करते हुए मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन न्यायधीश एस के मित्तल ने कहा की मानवाधिकार आयोग पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हमेशा संजीदा रहा है और शिकायतों के अलावा प्रेस के माध्यम से भी जो मामले हमारे संज्ञान में आते है आयोग उस पर भी पूरी संजीदगी से संज्ञान लेता है।  उन्होंने बताया की जो स्कूल बसों की सुविधा प्रोवाइड करवाते है लेकिन वह बच्चो की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखते जिसको लेकर हाल ही में ऐसे स्कूलों के मामले उनके पास आये है जिनमे एक – दो मामलो में बच्चो की मौत भी हुई है लेकिन अफ़सोस इस बात का है की जब आयोग ने संज्ञान लिया तो जो जवाब स्कूल की तरफ से आता है और जो स्टेण्ड वह लेते है वह बहुत दुखदायी है।  उन्होंने बताया की अभी हाल ही में उनके पास स्कूल बस से गिरकर चार साल के बच्चे की मौत का मामला आया है संज्ञान लेने पर स्कूल ने उन्हें जवाब दिया की बच्चे के माँ – बाप से कह दिया है की उनसे गलती हो गयी है।  उन्होंने कहा की यह कोई जवाब नहीं है और ऐसे मामले बर्दाश्त नहीं किये जाएंगे।
    पिछले वर्ष सीएम द्वारा जींद में कैंसर पीड़ित बच्चे के इलाज के लिए दी गयी एक लाख रूपये की सहायता राशि पीड़ित तक सरकारी विभाग के अफसरों द्वारा नहीं पहुचाय जाने के सवाल पर आयोग के चेयरमैन एस के मित्तल ने कहा की हमारे सरकारी विभागों के आफिसर किस तरह पॉलिसी फ्रस्ट्रेट कर देते है यह इस मामले में देखने को मिला।  जिसमे एक गरीब परिवार के कैंसर पीड़ित बच्चे को इलाज के लिए सीएम ने एक लाख रूपये की सहायता राशि जींद में भेजी थी लेकिन वह पैसा पीड़ित तक नहीं पहुंचाया गया जिसके चलते बच्चे की मौत हो गयी और उस मामले पर जब सुनवाई करते हुए उन्होंने जवाब माँगा तो अफसरों ने बड़ा ही असंवेदनशील जवाब देते हुए कहा की बच्चे का पिता पैसे लेने नहीं आया जिस पर उन्होंने पीड़ित को पांच लाख रुपया मुआवजा देने के आदेश दिए।  उन्होंने कहा की संविधान के अनुसार हर आदमी को न्याय मिलना चाहिए और यह न्याय सिर्फ कागजो तक सिमित नहीं रहना चाहिए और जो इसका उलंघन करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी।
    मानवाधिकार आयोग के फेसलो में राजनितिक दबाव के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा की कोई भी राजनीतिज्ञ यह नहीं कहेगा की आप अधिकारों की उलंघना करो पर कई बार ऐसा ज़रूर होता है की मानवाधिकार के उलंघन करने वालो को  बचाने की कोशिश ज़रूर होती है।  पर हमारा फर्ज है की हर आदमी को संविधान में जो राइट्स मिले है उसकी प्रोटेक्शन उसे मिलनी चाहिए।  आम लोगो को अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी के सवाल पर उन्होंने कहा की हम समस्य – समय पर मानव अधिकारों को लेकर विज्ञापन भी देते है लेकिन  फिर भी हम मीडिया से इन मामलो में सहयोग की अपील करते हैं क्योंकि मीडिया हमारे द्वारा लिए गए संज्ञानो और जो रिलीफ हम देते है उसकी रिपोर्टिंग करता रहता है जिससे लोगो को जानकारी मिलती है की मानवाधिकार आयोग किस तरह से उनकी सहायता कर सकता है।  निजी हस्पतालो में इलाज के नाम पर वायलेशन के सवाल पर उन्होंने कहा की ऐसे मामलो पर भी आयोग संज्ञान लेता रहता है और ऐसे एक – दो मामले उनके पास आये भी है। लेकिन मेडिकल नेग्लिजेंस एक ऐसा इशू है जिस पर सुप्रीम कोर्ट के बड़े जजमेंट हुए है।  लेकिन छोटे छोटे मामलो पर हम यदि अंकुश लगाएंगे तो डाक्टर भी इलाज करने से कतराएंगे।
    आयोग के चेयरमैन ने बताया की  2012 से 2018 तक जबसे हरियाणा में मानवाधिकार आयोग स्थापित हुआ है तब से अब तक आयोग में 13 हजार शिकायते आयी थी जिनमे से 11 हजार शिकायतों के मामलो को निपटा दिया गया है. वहीँ अकेले फरीदाबाद से 600 शिकायते पिछले छह महीने में आयी थी जिसमे से 472 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया और 134 शिकायते पेंडिंग है।

    ( टुडे एक्सप्रेस न्यूज़ के लिए अजय वर्मा की रिपोर्ट )


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