फरीदाबाद। तिगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित नागर को बुधवार सुबह उस समय पुलिस ने उनके सेक्टर-14 स्थित निवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया, जब वह दिल्ली में छात्र आंदोलन के समर्थन और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव सांसद प्रियंका गांधी तथा रोहतक के सांसद दीपेन्द्र हुड्डा सहित अन्य कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में अपने समर्थकों के साथ रवाना होने वाले थे। सुबह से ही फरीदाबाद पुलिस के सेंट्रल थाना और सीआईए की टीम बड़ी संख्या में उनके आवास पर पहुंच गई और उन्हें दिल्ली जाने से रोक दिया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक मौके पर पहुंच गए तथा पुलिस कार्रवाई के विरोध में भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान रोहित नागर के पिता एवं लोकसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता यशपाल नागर को भी पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। रोहित नागर अपने पिता के साथ दिल्ली जाने पर अड़े रहे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सेंट्रल थाना पहुंचा दिया। पुलिस थाने में भी सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंच गए। समर्थकों के बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने उन्हें रिहा तो किया, लेकिन दोबारा उनके आवास पर ले जाकर हाउस अरेस्ट कर दिया।
इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत में तिगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित नागर ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन भाजपा सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों से भयभीत होकर पुलिस प्रशासन का सहारा ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज़ उठाने वालों को रोकना लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी व सांसद दीपेन्द्र हुउ्डा सहित वरिष्ठ कांग्रेसजन लगातार युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों—परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं के भविष्य—को संसद से लेकर सडक़ तक मजबूती से उठाते रहे हैं। ऐसे समय में छात्र आंदोलन के समर्थन में खड़े होने वाले नेताओं को हिरासत में लेना यह दर्शाता है कि सरकार छात्र हितों से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का रास्ता अपना रही है।
रोहित नागर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है और इससे देश के युवाओं तथा छात्रों में गलत संदेश जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग करते हुए कहा कि यदि छात्र लगातार सडक़ों पर उतरने को मजबूर हैं, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफा देने अथवा उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों का विश्वास बहाल करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
रोहित नागर ने कहा कि कांग्रेस छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई, हिरासत और हाउस अरेस्ट जैसी कार्रवाइयों से जनआंदोलनों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता और कांग्रेस संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी।
