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    बून ने पर्यावरण दिवस पर गुरुग्राम पुलिस को कांच की 300 बोतलें भेंट कीं

    vishal rajputBy vishal rajput07/06/2023No Comments4 Mins Read

    स्टिक की बोतल पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य के साथ ज्यादा स्थायी हाइड्रेशन समाधान अपनाने के लिए पुलिस की मदद

    गुरुग्राम, जून 07, 2023 : आइओटी वॉटरटेक स्‍टार्टअप, बून ने विश्व पर्यावरण दिवस पर 5 जून, 2023 को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित उद्योग विहार पुलिस स्टेशन में गुरुग्राम पुलिस को कांच से बनी 300 पानी की बोतलें भेंट की। पुलिसकर्मियों को प्लास्टिक-मुक्त प्लास्टिक मुख्त पीने का पानी प्रदान करने पर केन्द्रित इस कार्यक्रम में मशहूर एसीपी, श्री मनोज कुमार, उपस्थित थे।

    यूएनईपी (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) के अनुसार, हर मिनट प्लास्टिक की 1 मिलियन बोतलें खरीदी जाती हैं। इन सिंगल यूज़ प्लास्टिक वॉटर बॉटल्‍स को लम्बी दूरी तक ले जाने की ज़रुरत होती है, जिससे ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं और हमारे कमजोर इकोसिस्टम पर गंभीर ख़तरा पैदा होता है। इसके अलावा, प्लास्टिक की अधिकाँश बोतलें पॉलीईथलीन टेरेथैलेट (PET) से बनी होती हैं। हाल ही में किये गए अनुसंधान से पता चलता है कि बोतलों में थैलेट सूक्ष्म प्लास्टिक कणों (आकार में पाँच मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक का कचरे के नन्हे टुकड़े) में विखंडित होकर आपके पानी में घुल सकता है। विशेषकर, ज्यादा गर्मी में रहने या लम्बे समय तक स्टोर करने से ऐसी आशंका ज्यादा होती है।

    बून द्वारा चलाये जा रहे नेट जीरो वॉटर इनिशिएटिव का लक्ष्य न केवल कार्बन घनत्व कम करना, बल्कि सूक्ष्म प्लास्टिक से मुक्त सेहतमंद और स्थायी विकल्प प्रदान करना भी है। गूगल, पेप्सिको, और मैक्किंसी जैसे अनेक कॉर्पोरेट दिग्गज और ताज, ओबेरॉय आदि जैसे होटल चेन पहले ही से बून के नेट जीरो वॉटर इनिशिएटिव से जुड़ चुके हैं।

    5 जून को पूरे विश्व में मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण संरक्षण और विशेषकर प्लास्टिक के प्रयोग और कचरे का मुकाबला करने के लिए जन जागरूकता बढ़ाना है। इस अभियान के तहत, बून द्वारा कांच की बोतलें दान देने का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ जल की सुलभता, प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण और गंदे पानी की समस्या को दूर करने, एकल-प्रयोग वाले प्लास्टिक की बोतलों पर निर्भरता कम करने और दोबारा प्रयोग होने तथा भरे जाने वाले विकल्पों को बढ़ावा देना है।

    बून की एमडी, डॉ. विभा त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि, “बून में हम जल प्रदूषण, संरक्षण और स्थायी जल प्रबंधन पद्धतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करते हैं। गुरुग्राम पुलिस के साथ हमारा नवीनतम अभियान पर्यावरण से सम्बंधित चुनौतियों को हल करने और ज्यादा स्वस्थ तथा स्थायी पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की दिशा में एक और कदम है।”

    उन्‍होंने आगे कहा कि, “हमारा मानना है कि विशेषकर हमारे पुलिस बल के लिए ड्यूटी के दौरान ध्यान, ऊर्जा का स्तर और समग्र शारीरिक एवं मानसिक कार्यप्रदर्शन बनाए रखने के लिए हाइड्रेशन बेहद महत्वपूर्ण है। शुद्धिकरण प्रणाली और कांच की बोतलों को भेंट करना एक कारगर कदम है।”

    मशहूर एसीपी, श्री मनोज कुमार ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “हम इस अभियान के लिए बून को हार्दिक धन्यवाद देते हैं। इस अभियान से हमारे पुलिस बल को इस क्षेत्र में खुद को पर्यावरण प्रहरी के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। हमारा विश्वास है कि विश्व पर्यावरण दिवस पर इस पहल का पुलिस बल पर सकारात्मक प्रभाव होगा। इस पहल में स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पर्यावरण संबंधी जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति ज्यादा सचेत समाज के समग्र विकास में योगदान करने की व्यापक संभावना है। साथ ही, इससे गुरुग्राम ज्‍यादा सुरक्षित तथा ज्यादा सस्टेनेबल बनेगा।”

    सिंगापुर स्तिथ बून ने भारत एवं प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में जबरदस्त वृद्धि का प्रदर्शन किया है। रणनैतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थान में स्थित होने के कारण इसे पानी की गुणवत्ता और हाइड्रेशन डिलीवरी के मामले में आसियान राष्ट्रों (दक्षिण-पूर्व के एशियाई देश)के लिए दृश्यता मिलती है। भारत में बून की मजबूत मौजूदगी है, जहाँ गुरुग्राम में इसका अनुसंधान और विकास (आरऐंडडी) केंद्र है और मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद एवं पुणे में इसकी टीमें कार्यरत हैं। इसके अलावा इसने अफ्रीका और मध्य पूर्व क्षेत्र में अपना विस्तार किया है और आसियान क्षेत्र में अपने विस्तार की योजना पर काम कर रहा है।

    बून (स्वजल) के विषय में :

    बून, जो पहले स्वजल के नाम से जाना जाता था, एक प्रभावी वॉटर-टेक स्टार्टअप है जो पेय जल के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए तकनीक और नवाचार का प्रयोग करता है। बून जल को एक वरदान मानता है। वर्ष 2014 में बून के वॉटरएटीएम™ की शुरुआत की थी और निगरानी के लिए क्लेयर्वोएंट™ नामक विश्व का पहला आईओटी monitoring प्लैटफॉर्म विकसित किया था।

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