रोडवेज के कंडेक्टर की मनमानी पर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने पीड़ित यात्री को दिलवाया न्याय , पढ़े पूरी खबर

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Haryana Human Rights Commission

टुडे एक्सप्रेस न्यूज़ / रिपोर्ट / अजय वर्मा / हरियाणा रोडवेज की बस में सफर कर रहे पवन नामक व्यक्ति ने हरियाणा मानव अधिकार आयोग को अपनी शिकायत देते हुए कहा कि 6 और 7 सितंबर 2019 की रात को जब वह अपने भाई के साथ गोगा मेडी हिसार से जींद आ रहा था तो रात को 1:00 बजे कंडक्टर अनिल कुमार के साथ टिकट लेने के विषय पर कुछ विवाद हुआ क्योंकि पैसे देने के बाद भी टिकट देने में आनाकानी कर रहा था और मुश्किल से उसे टिकट दी गई उसके बाद उक्त कंडक्टर का कुछ बुजुर्ग लोगों से भी टिकट ना देने को लेकर झगड़ा हुआ जिसकी वीडियो बनाने का प्रार्थी ने प्रयास किया जिस पर कंडक्टर अनिल कुमार भड़क गया तथा उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया प्रार्थी को  चोट भी लगी और शोर होने के बाद कंडक्टर ने ड्राइवर को बस को पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए कहा परंतु पुलिस स्टेशन की बजाए वह बस को रोडवेज की वर्कशॉप में ले गए जहां पर कई लोगों ने मिलकर प्रार्थी की पिटाई करी जिसके बाद वह पुलिस थाने में उक्त अभियुक्तों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने गया परंतु पुलिस ने उसकी शिकायत ना दर्ज करके बाद में उल्टा प्रार्थी के खिलाफ यह झूठा मुकदमा बना दिया जिसे बाद में तफ्तीश करने पर झूठा पाया गया और f.i.r. को कैंसिल कर दिया गया।

रोडवेज ने अपनी जांच के अंदर प्रार्थी के व्यवहार को तो गलत तो माना परंतु पूरी घटना की सत्यता को प्रमाणित नहीं किया । कंडक्टर अनिल कुमार का तबादला दूसरे जिले भिवानी में कर दिया गया परंतु उसके खिलाफ कोई और अपराधिक या कठोर कार्रवाई नहीं की गई ।

इस विषय की शिकायत प्रार्थी ने हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने को की जिसकी सुनवाई जस्टिस एस. के. मित्तल चेयरमैन हरियाणा मानव अधिकार आयोग एवम् सदस्य दीप भाटिया ने की और पाया कि प्रार्थी के मानव अधिकारों का हनन किया गया है और ऐसे में मुआवजे के माध्यम से उसकी भरपाई की जानी आवश्यक है अतः 20000/रु बतौर मुयावजा हरियाणा सरकार को तीन महीने देने के लिए कहा है जिसे सरकार चाहे तो दोषी कर्मचारी से वसूल कर सकती है साथ में ही आयोग की खंडपीठ ने डी.जी.पी. हरियाणा को अपराधी व्यक्तियों के खिलाफ डाक्टरी रिपोर्ट में बताई गई चोटो के अनुसार कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है।

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